अयोध्या: मामला जनपद के जिलाधिकारी कार्यालय व आवास से चंद कदम दूर स्थित नैय्यर कॉलोनी, मोदहा सिविल लाइन से जुड़ा है जहां 500 करोड़ की बेशकीमती सरकार द्वारा घोषित नजूल सम्पत्ति पर 35 वर्षों से भू माफियाओं पर कब्जा बरकरार है 2008 में नजूल अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार गाटा संख्या: 4054 को पूर्व जिलाधिकारी के० के० नायर की पत्नी शकुन्तला नायर ने राजा रफीक हुसैन के पुत्र बादशाह हुसैन से पंजीकृत बैनामे से प्राप्त की थी और राजा रफीक को ब्रिटिश सरकार ने 18 सितंबर 1891 में 99 वर्ष के लिया पट्टा प्रदान किया था जो 14 सितम्बर 1990 को समाप्त हो चुका था पूर्व जिलाधिकारी के सिपहसालारों ने नजूल भूमि को कई व्यक्तियों को बैनामा कराया और फ़िर उन्हीं अन्य लोगों ने भी कई अन्य को बैमाने कर डाले और ज़मीन नजूल में निहित होने के बावजूद लगातार ज़मीन के बैनामे होते रहे और बिना फ्री होल्ड /नामांतरण के सरकारी संपत्ति पर दो, तीन मंजिला मकान, बंगले और व्यवसायिक संस्थान बनवाकर जमकर आमदनी भी की गई , जिस समय विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने प्रेम सोनी की बिल्डिंग अवैध बताकर गिराई उस समय भी तमाम शिकायतो के बाद भी अवैध कब्जेदार धड़ल्ले से निर्माण कार्य कर रहे थे 2023 में THE JOURNALIST ने खबर की पड़ताल की थी
तब नौकरशाहों के हाथ पांव फूल गए थे जांच कमेटी बनाई गई जांच में सामने आया कि नजूल गाटा संख्या जिसका रकबा 14 बीघे से अधिक है उसमें लगभग 6 बीघे का फ्री होल्ड वर्ष 1996 से 2005 के बीच कराया गया है जिसमें पट्टा विलेख, अंतरण व फ्री होल्ड के आवेदनों में अलग अलग दिन - तारीख़ व झूठी बयानबाजी की गई, लेकिन बाद में उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया कारण साफ़ था ये सब कराने वालों में नेताओं के रिश्तेदार , व्यापारी व नामी डॉक्टर शामिल है जिनके पास अकूत पैसा और सत्ता तक हनक है जब अन्य कब्जेदारों ने ये मामला उठाया कि सिर्फ़ ख़ास लोगों की भूमि ही फ्री होल्ड क्यों हुईं, लगभग 5 दर्जन से अधिक लोगों ने सामूहिक मांग के साथ उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की, जिलाधिकारी को अनुपालन के लिए प्रति भेजी गई, जिलाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शासनादेश संख्या दिनांक 3 अक्टूबर 1994 के अनुसार किसी भी भूमि जिसका पट्टा समाप्त हो चुका है नवीन पट्टा स्वीकृत नहीं किया जायेगा, लेकिन उन अधिकारियों पर गाज गिरने से बचा दिया गया जिन्होंने ख़ास लोगों को क़ानून तोड़कर फ्री होल्ड दे दिया अगर पूर्व में ही अधिकारियों ने अपने अधीनस्थों को नहीं बचाया होता तो दर्जनों अधिकारी भी कानून की जद में आ जाते , एक बाद जो न्यायालय में लंबित है उसमें आम लोगों को नोटिस भेजकर, बुलडोजर का डर दिखाकर अवैध वसूली वाला अयोध्या विकास प्राधिकरण अभी तक हाजिर होने की हिम्मत तक नहीं दिखा सका ,सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जेदारों में सेल टैक्स विभाग का सरकारी कार्यालय भी बना है, जिन लोगों ने संरक्षित पार्क और सड़क, नालियों को नक्शे के अलावा ज़मीन से गायब कर दिया उसमे अशोक सोनी, राजेश, लोकप्रिया, वर्मा गन हाउस, दिनेश श्रीवास्तव, खेतान, टंडन बुक डिपो, अरविंद सिंह जैसे बाहुबली शामिल हैं जिनको सरकार, कानून का कोई भय नहीं लगातार नजूल भूमि पर निर्माण और व्यापार जारी है भ्रष्टाचार की चरस का असर नजूल विभाग, जिलाधिकारी कार्यालय, अयोध्या विकास प्राधिकरण सहित नगर निगम पर भी हावी है जो विकास के नाम शहर की साधारण लोगों को कानून का डंडा दिखाते हैं जबकि खुलेआम शहर के बीचों बीच अरबों की सरकारी संपत्ति को अवैध कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहे है योगी सरकार के 8 साल पूरे होने के बाद भी जीरो टॉलरेंस वाली सरकार के नौकरशाहों ने अपनी अपार प्रतिभा से मामले को दबा रखा है |





